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मौसी का मूत पीकर गांड मारी – 2

| Story | November 5, 2018

प्रेषक : राहुल …

हैल्लो दोस्तों, में आशा करता हूँ कि मेरी पहली कहानी साक्षी मौसी की चुदाई आपको अच्छी लगी होगी। मेरा नाम राहुल है और मेरा लंड 8 इंच लम्बा है, जैसा कि मैंने आपको पहले बताया था कि मेरी मौसी साक्षी जो एक टी.वी एक्ट्रेस है, उनको मैंने कैसे चोदा था? अब में उसके आगे की स्टोरी आप सबको बताने जा रहा हूँ। फिर साक्षी की चूत मारने के बाद जब में वापस घर आया तो में हमेशा उसकी जवानी के बारे में सोचता रहता था। अब में रोज़ उसके नाम से मेरा लंड हिलाता था, लेकिन मेरे एग्जॉम दो महीने के बाद होने के कारण मेरी माँ ने मुझे मौसी के यहाँ जाने नहीं दिया। फिर एक दिन में घर में अपने कमरे में बैठा हुआ था, तो मेरे मोबाईल पर रंडी साक्षी का फोन आया।

में : हैल्लो, कैसी है रंडी?

साक्षी : तेरे लंड की याद में अपनी चूत में उंगली कर रही हूँ, साले मादरचोद।

में : में भी तो तेरी याद में अपना लंड हाथ में लेकर बैठा हूँ, तेरी चूत की महक सूँघने के लिए बेताब हूँ छिनाल।

साक्षी : अपनी मौसी को छिनाल और रंडी कहता है और उसी रंडी को 3 महीने से भूखा रखता है, साले माँ के लंड। तुझे इतना भी मालूम नहीं कि रंडी को रोज़ चोदा जाता है, तू कब आ रहा है मेरे राजा? तेरी याद में गाजर, मूली और मोमबत्ती से ही काम चलाना पड़ता है, तुझे अपनी इस रंडी का ज़रा सा भी ख्याल नहीं है।

में : क्या करूँ तेरी याद में, में भी तो अपना लंड हिला रहा हूँ? लेकिन 2 महीने के बाद एग्जॉम होने के कारण माँ मुझे आने नहीं दे रही है जानेमन।

साक्षी : ओके, तो इसका मतलब मेरी चूत की खुजली मिटाने के लिए मुझे ही कुछ करना पड़ेगा।

फिर उसने फोन कट कर दिया और मैंने भी फोन रखा। तभी डोर बेल बजी, तो माँ ने आवाज़ दी बेटा दरवाजा ओपन करना, में बाथरूम में हूँ।

फिर मैंने दरवाजा खोला तो में खुशी से पागल हो उठा, अब साक्षी दरवाजे पर खड़ी थी, उसने बहुत सारा मेकअप किया हुआ था, उसने उसके होंठो पर लाल लिपस्टिक लगाई थी, जो मुझे उत्तेजित कर रही थी। उसका स्लीवलेस ब्लाउज बहुत टाईट और थोड़ा पारदर्शी था, जिससे मुझे उसकी चूची साफ़-साफ़ नज़र आ रही थी। फिर वो मुझे देखकर हँसी और बोली कि कैसा लगा सर्प्राइज़? तो मैंने कुछ ना कहकर, उसे अंदर लिया और दरवाजा बंद करके उसे अपनी बाहों में ले लिया और उसकी चूची को ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगा। तो वो बोली कि इतनी जल्दी भी क्या है राजा? तेरी माँ ने देख लिया तो मुश्किल हो जाएगी। फिर में उसे ज़ोर से किस करने लगा और उसकी गांड दबाने लगा और बोला कि माँ बाथरूम में है तब तक मुझे मत रोको, मुझे तेरी जवानी का रस चखने दे जान। तो फिर उसने मुझे दूर किया और बोली कि सब्र का फल मीठा होता है राजा। तभी माँ भी वहाँ आ गयी और बोली कि साक्षी तू कब आई? तो साक्षी बोली कि बस अभी-अभी आई हूँ।

फिर माँ ने कहा कि अच्छा हुआ तू आ गयी, ये नालायक हमेशा तेरे घर जाने की ज़िद करता रहता है। फिर साक्षी ने मुझे स्माइल दी और आँख मारी और फिर बोली कि मुझे भी आप दोनों की बहुत याद आ रही थी इसलिए 2 दिन की शूटिंग कैंसिल करके रहने आई हूँ। अब साक्षी 2 दिन मेरे घर में रहने वाली यह सुनकर में दिल ही दिल बहुत खुश हो गया था। अब मेरे पापा बिज़नस टूर पर होने के कारण घर में हम तीन ही लोग थे में, माँ और मेरी सेक्सी रंडी मौसी साक्षी। मेरी माँ का नाम अर्चना है और उनके फिगर 38-32-36 है, वो एक सुंदर सुडौल हाउसवाईफ है, उनके लिप्स पतले और रसीले है, उनका चूतड़ बड़ा और टाईट है, उनका चेहरा बड़ा ही कामुक है, जब वो चलती है तो उसका चुत्तड वर्टिकली हिलता था, सभी लोग मेरी माँ के चूतड़ पर फिदा थे। मुझे ऐसा लगता था कि माँ पापा से अपनी गांड ज़रूर मरवाती होंगी, क्योंकि जब वो रास्ते से चलती तो सब लोग उसे मूड-मूडकर देखते है और अपने खड़े लंड को पेंट में एड्जस्ट करते है। में भी उसके गोरे-गोरे बदन को देखता हूँ तो पागल हो जाता हूँ, वो हमेशा साड़ी पहनती थी, उनका ब्लाउज इतना लो-कट होता है कि उनकी आधे से ज़्यादा चूची दिखाई देती रहती थी।

एक बार तो मैंने माँ का निपल भी देखा था, वाह क्या निपल था? मेरा मन तो कर रहा था कि फिर से छोटा बन जाऊं और अपनी माँ का दूध पी लूँ। मेरी माँ इतनी गोरी है कि में कभी-कभी सोचता हूँ कि उसकी चूत कितनी लाल-लाल होगी? सच बोलूं तो में अपनी माँ को नंगा देखना चाहता था, लेकिन हमेशा डर सा लगता और एक गंदी फिलिंग आती थी, लेकिन में हवस के कारण मजबूर था। फिर जब वो खाना परोसती, तो में माँ के बड़े-बड़े स्तन देखता और जब वो घर की सफाई करती, तो में उनके पीछे-पीछे रहता था कि में उनके चुत्तड देख सकूँ, तो कभी-कभी में माँ की गांड पर अपना हाथ भी लगाता था।

तो कभी-कभी अपना लंड भी माँ के चूतड़ पर रगड़ देता था और ऐसे दिखाता था जैसे मानो की अंजाने से हुआ हो। अब वो कुछ नहीं कहती थी, मेरे पड़ोसवाले और मेरे दोस्त भी मेरी माँ को गंदी नज़र से देखते थे और शायद माँ के नाम की मूठ भी मारते होंगे। एक बार में गार्डेन में था तो झाड़ी के पीछे मेरे पड़ोस वाले दोस्त रवि और विवेक बातें कर रहे थे, में उन्हे नज़र नहीं आ रहा था, लेकिन जब मैंने उनकी बातें सुनी तो हैरान हो गया।

रवि : क्या मस्त माल है अर्चना आंटी? अगर एक दिन के लिए मिल जाए तो उसको चोद-चोदकर छठी का दूध याद दिला दूँ।

विवेक : क्या रसीली चूत होगी साली की? में तो पहले उसकी गांड मारूँगा, साली जब मटक-मटककर चलती है तो मन करता है कि रंडी की गांड मार दूँ, साली का पति बड़ा भाग्यशाली है कि रोज़ ऐसी चिकनी चूत चाटने को मिलती होगी।

रवि : अरे उसके पति को जाने दे अपना राहुल कितना भाग्यशाली है? कि उसे ऐसी माल माँ मिली है, वो मेरी माँ होती तो में उसे रोज़ चोदता, उससे नंगा नाच करवाता, उस साली को रंडी बनाकर चोदता और प्रेग्नेंट कर देता।

विवेक : हाँ यार सच राहुल बहुत भाग्यशाली है, में होता तो माँ की गांड मारता और उसे दिन में 4 बार चोदता, उसके मुँह में अपना लंड देता और सुबह शाम चुसवाता छिनाल से।

रवि : में तो साली की नंगी तस्वीरे मेरे पूरे बेडरूम में लगाता और उसे अपने बाप के सामने ही चोद देता, उसकी ब्लू फिल्म निकालता और खुद भी चोदता और उसे अपने दोस्तों से भी चुदवाता।

अब यह सब सुनकर मेरा लंड खड़ा हो गया था और फिर मैंने घर जाकर अपनी माँ के नाम की मूठ मार दी। उस दिन मेरी माँ साक्षी से पूरा दिन बातें करती रही और अब में उसे चोदने का मौका ढूंढ रहा था। अब जब माँ किचन में जाती, तो में साक्षी के बूब्स और चूतड़ दबाता, उसकी गांड को पिंच करता, तो वो मुझे कामुक नज़र से देखती, तो में और जोश में आ जाता था। फिर दूसरे दिन सुबह माँ जब सब्जी लेने गयी, तो मुझसे रहा नहीं गया और मैंने साक्षी को पीछे से जाकर पकड़ लिया और उसके बूब्स साड़ी के ऊपर से ही दबाने लगा। फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसे चूसने को दिया, तो वो रंडी की तरह मेरा लंड चूसने लगी। फिर मैंने उसकी साड़ी ऊपर उठानी शुरू की और उसके चूतड़ के ऊपर ले आया। अब में उसके पीछे आकर उसकी गांड और चूत को चाटने लगा था, अब साक्षी को भी बहुत मज़ा आ रहा था।

साक्षी : अब मत तड़पाओ, चोदो मुझे जल्दी।

तो फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया और ज़ोर-ज़ोर से आगे पीछे करने लगा। अब वो जोर- जोर से चिल्ला रही थी, तो में और ज़ोर-जोर से उसकी चूत मारने लगा। फिर थोड़ी देर में झड़ने के बाद हम दोनों हॉल में आकर बैठ गये। अब माँ भी बाज़ार से लौट आई थी, अब में और साक्षी हॉल में टी.वी देख रहे थे और माँ किचन में खाना बना रही थी। फिर मैंने साक्षी को अपनी चूत दिखाने को कहा, तो साक्षी ने अपने दोनों पैरो को मोड़ लिया और अपनी साड़ी ऐसे ऊपर की मुझे उसकी चूत साफ साफ़ नज़र आ रही थी। उसने चड्डी नहीं पहनी थी, मैंने उसे चोदते वक़्त उसकी चड्डी अपने पास रख दी थी, ताकि जब वो चली जाएगी तो में उसकी चूत की खुशबू चड्डी से ले सकूँ और जब उसकी चड्डी में अपना लंड रखूं तो मुझे उसकी चूत की फिलिंग आए। अब टी.वी देखते वक़्त सास भी कभी बहू थी सीरियल चल रहा था, तो साक्षी ने पूछा कि तुझे इस सीरियल में कौन पसंद है?

में : रक्षंदा ख़ान, में जब भी उसे देखता हूँ तो मेरे लंड की हालत खराब हो जाती है, साली क्या मस्त दिखती है? वो टी.वी सीरियल कि नंबर वन रांड है अगर एक बार उसे चोदने को मिल जाए तो उसकी माँ चोदकर रख दूँगा।

साक्षी : तुम सब मर्द चुदाई के अलावा कुछ नहीं देखते हो?

में : तुम औरत भी तो हमारे केले खाने के लिए हमेशा तैयार रहती हो।

साक्षी : और तुलसी कैसी लगती है तुम्हें?

में : उसने अपनी गांड में ना जाने कितने केले लिए होगी? तभी तो उसकी गांड इतनी बड़ी हो गयी है, में जब भी उसकी गांड को देखता हूँ तो माँ की गांड याद आती है।

साक्षी : (शॉक्ड) क्या तुम दीदी की गांड देखते हो?

तभी माँ हॉल में आई और खाना रखा और अपने चूतड़ हिलाते-हिलाते किचन में जा रही थी। अब माँ की साड़ी उसके चूतड़ के बीच में फंसी थी। अब में माँ के चूतड़ देख रहा था और अपने एक हाथ से लंड को सहला रहा था। तो साक्षी मौसी यह सब देखकर हंस पड़ी और बोली कि साले गांडू अपनी माँ के चूतड़ देखता है, तो में भी शर्मा गया और अपनी गर्दन झुका दी। फिर रात को मैंने माँ के दूध में नींद की गोली मिला दी। अब साक्षी और माँ एक कमरे में ही सोए हुए थे, फिर करीब एक घंटे के बाद में उनके कमरे में गया तो मैंने देखा कि माँ गहरी नींद में थी। फिर में साक्षी के ऊपर चढ़ गया और उसे किस करने लगा। फिर मैंने उसकी साड़ी ऊपर की और उसकी जांघो को चूमने लगा। फिर मैंने उसकी चिकनी चूत को चाटना शुरू किया, तो वो तड़प उठी आ आ अहह प्लीज़ अहह और करो करो, चूसो मेरी चूत को अहह।

फिर थोड़ी देर तक ऐसे ही चूसने के बाद मैंने उसकी चूत में अपनी उंगली डाल दी और आगे पीछे करने लगा, क्या मज़ा आ रहा था? अब माँ गहरी नींद में थी और में अपनी माँ के सामने ही अपनी मौसी को चोद रहा था और अब वो भी बेशर्म होकर अपने बड़ी बहन के लड़के से चुदवा रही थी। अब में अपना लंड उसकी चूत में डालकर धक्के देने लगा था।

साक्षी : और चोदो और चोदो आज मेरी चूत फाड़ दो, तेरी माँ के सामने चुदवा रही है तेरी मौसी, चोद और चोद।

उस रात मैंने उसको 4 बार चोदा और फिर में अपने कमरे में सोने चला गया। फिर सुबह जब मेरी नींद खुली तो में माँ के कमरे में गया, तो मैंने देखा कि माँ की साड़ी माँ की जांघो के ऊपर थी और उनका पल्लू भी बूब्स से हटा था। अब मेरी माँ की गोरी-गोरी जांघे देखकर मेरी हवस बढ़ गयी थी। फिर मैंने जाकर माँ की जाँघो पर धीरे से अपना हाथ फैरा और धीरे से उनकी जांघो को चूमा, क्या मस्त नर्म- नर्म जांघे थी माँ की? फिर मैंने थोड़ा झुककर उनकी साड़ी के अंदर देखा, तो मुझे माँ की चड्डी नज़र आई। अब उस चड्डी में माँ की मस्त फूली हुई चूत देखकर मेरा मन कर रहा था कि माँ की चड्डी उतारकर सारा माल देख लूँ। अब यह सब साक्षी दरवाजे पर खड़ी होकर देख रही थी। फिर जब मैंने उसे देखा, तो वो मुझे हॉल में लेकर आई और बोली कि।

साक्षी : क्यों साले रंडी की औलाद, क्या देख रहा था?

में : मौसी, सच में क्या मस्त माल है तेरी बड़ी बहन? उसकी जांघे क्या मुलायम है? मेरा तो चाटने का दिल कर रहा था।

साक्षी : तो चोदता क्यों नहीं अपनी माँ को?

में : में माँ को कैसे चोदूं? वो नहीं मानेगी।

साक्षी : क्यों? मौसी मान गयी, तो माँ भी मान जाएगी।

में : सच।

साक्षी : तुझे पता नहीं तेरी माँ अपने जमाने की बहुत बड़ी रंडी थी, उसने तो अपना पहला सेक्स अनुभव अपने स्कूल के टीचर के साथ लिया था।

में : अब में माँ के बारे में यह सब सुनकर शॉक्ड था।

साक्षी : कॉलेज में तो साली रोज़ नया-नया केला खाती थी और मुझे भी खिलवाती थी, तेरी माँ को तो एक साथ दो-दो लंड भी कम पड़ जाए, तेरी माँ इतनी बड़ी चुदासी है।

साक्षी : एक बार अपना 8 इंच का लंड दिखा दे, तो वो अपने बेटे से अपने चूतड़ उठा-उठाकर चुदवाएगी, तेरी माँ साली बड़े-बड़े केले खा चुकी है, साली ने अपने बड़े भाई को भी अपनी चूत दी है।

अब में यह सब सुनकर और उत्तेजित हो गया तो मैंने साक्षी को फिर से एक बार और चोद दिया। फिर शाम को घर जाते समय साक्षी मुझसे बोली कि अपनी माँ को ज़रूर चोदना और मुझे ना भूल जाना, हम दोनों बहनें तुझे एक साथ चुदाई का आनंद देंगी और फिर वो चली गयी ।।

धन्यवाद …


Source: www.kamukta.com/feed/


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